महाराष्ट्र में FMCG वितरकों ने हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान किया है। कंपनी द्वारा उनकी चिंताओं का जवाब देने में विफल रहने के बाद उन्होंने कोलगेट पामोलिव इंडिया लिमिटेड को सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है। यदि पारंपरिक FMCG वितरकों द्वारा प्रस्तावित मांगों को पूरा नहीं किया जाता है, तो हमारा अपने पड़ोस के स्टोर से आवश्यक उत्पाद खरीदना मुश्किल हो सकता है। इस लेख में, हम चर्चा करेंगे कि वितरक और फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (Fast-Moving Consumer Goods – FMCG) फर्मों के बीच मनमुटाव क्यों हैं और क्या है इसके पीछे की वजह।
FMCG डिस्ट्रीब्यूटर्स मैन्युफैक्चरर्स के खिलाफ बगावत क्यों कर रहे हैं?
दशकों से, वितरक निर्माताओं और खुदरा विक्रेताओं के बीच की कड़ी रहे हैं। वे हमारे पड़ोस की दुकान में दूध, ब्रेड, अंडे, बिस्कुट, नमकीन और अन्य आवश्यक सामान पहुंचाते हैं। FMCG कंपनियों के उत्पाद पूरे भारत में पारंपरिक वितरकों के सामान्य स्टोर पर मिलते हैं, और उपभोक्ताओं के पास चुनने के लिए एक विस्तृत विविधता है। रिपोर्टों के अनुसार, वे हमारे देश में कुल खुदरा बाजार का लगभग 90% सेवा प्रदान करते हैं।
नए जमाने के थोक वितरकों का उदय:
दुर्भाग्य से, कोविड -19 महामारी ने उनके संचालन को गंभीर झटका दिया। लॉकडाउन प्रतिबंधों के कारण हजारों वितरक काम नहीं कर पा रहे थे। उसी समय, हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी, नेस्ले इंडिया, कोलगेट पामोलिव इंडिया और अन्य प्रमुख FMCG कंपनियों ने नए जमाने के संगठित थोक वितरकों की ओर रुख किया। JioMart, Udaan, Booker, Metro Cash & Carry, ElasticRun और Jumbotail के कारोबार पिछले एक साल में फले-फूले हैं।
इन फर्मों को वैश्विक उद्यम पूंजी और निजी इक्विटी फर्मों का समर्थन प्राप्त है और इस प्रकार, उनके पास बहुत अधिक कॅश है। जबकि पारंपरिक वितरक 10-15 दिनों के भीतर (क्रेडिट आधार पर) माल का भुगतान करते हैं, JioMart जैसी कंपनियां निर्माताओं को तुरंत भुगतान करती हैं। नतीजतन, FMCG कंपनियां नए नेटवर्क को पसंद करने लगी हैं और अपने उत्पादों पर थोक वितरकों को भारी छूट देने लगे हैं, जो ऑनलाइन काम करते हैं।
इसका अंतत: मतलब यह है कि, नए जमाने के वितरक अब दुकान मालिकों को 15-20% की सीमा में काफी बड़े मार्जिन की पेशकश कर सकते हैं। वे बहुत कम दरों पर सामान बेचने में सक्षम हैं। Jiomart और Udaan द्वारा पेश किए गए ऐप दुकान मालिकों को कुशलतापूर्वक उत्पाद प्राप्त करने की अनुमति देते हैं। इन फर्मों से कम कीमतों पर खरीदारी करने से उनके मार्जिन में सुधार हुआ है। इस बीच, पारंपरिक वितरक केवल 7-12% का मार्जिन ही प्रदान कर सकते हैं।
आगे क्या?
ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF), जो 4 लाख से अधिक वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है, पारंपरिक और नए जमाने के वितरकों के बीच उत्पादों की कीमत के असमानता पर FMCG फर्मों के साथ बातचीत कर रहा है। उन्हें लगता है कि JioMart और ऐसी ही अन्य कंपनियों द्वारा स्थापित नेटवर्क उनके कारोबार को तबाह कर रहे हैं। AICPDF ने फर्मों को लिखा था कि, नए जमाने की बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) कंपनियां स्थानीय दुकानों को अपने उत्पादों की तुलना में कम दरों पर उत्पाद पेश कर रही हैं, और उनकी प्रतिष्ठा और गुडविल को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।
1 जनवरी से पारंपरिक वितरकों ने किराना स्टोर्स में लोकप्रिय FMCG उत्पादों की आपूर्ति का बहिष्कार कर दिया है। उन्होंने कंपनियों को तब तक हड़ताल करने की चेतावनी दी है, जब तक कि वे उन्हें नए जमाने के वितरकों के समान मूल्य और मार्जिन देने का वादा नहीं करती हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यह संभावना नहीं है कि पारंपरिक वितरक पूरी तरह से व्यवसाय से बाहर हो जाएंगे। हालांकि, पूरे उद्योग की गतिशीलता शायद बदल जाएगी।
आइए देखें, कि आने वाले दिनों में स्थिति कैसी होती है।